जीवनशैली की गति

यह समस्या मल्टीनेशनल की देन है आज से कुछ दशकों पूर्व, जब यह मल्टीनेशनल का कल्चर भारत तक नहीं पहुंचा था लोग सवेरे 10:00 बजे भर पेट खाना खाकर ऑफिस स्कूल कॉलेज आदि जाते थे व शाम को 6:00 बजे तक घर लौट कर भोजन कर लेते थे | उनका कार्यकाल अधिक से अधिक 8 घंटे हुआ करता था अतः वे निरोगी व दीर्घायु थे |

आजकल मल्टीनेशनल ने अपने कार्यकाल को 8 घंटों से बढ़ाकर 13-14 घंटो तक कर दिया है और उनकी देखादेखी भारत के सभी छोटे-बड़े उद्योग करने वालों ने भी कार्यकाल बढ़ा दिए हैं, इसके अलावा खास करके शहरों में ऑफिस, स्कूल, कॉलेज आने जाने में 2 से 3 घंटे अलग से लग जाते हैं | जिसके कारण स्वस्थ मनुष्य के पास नींद, भोजन, स्नान आदि के लिए लगभग 8 ही घंटे बचते हैं | अब ऐसे व्यक्तियों का स्वास्थ्य कैसा रहता है इसे एक उदाहरण लेकर देखें- एक व्यक्ति ऑफिस से घर रात को 8-9 बजे पहुंचता है | थोड़ा आराम करके रात 10 बजे भोजन करके थोड़ा टीवी ,न्यूज़पेपर पढ़ कर सोने के लिए उसे 11 बज जाते हैं | दूसरे दिन सवेरे 9 बजे ऑफिस, स्कूल, कॉलेज पहुंचने के लिए उसे सवेरे 6 बजे उठना पड़ता है |

किसी कारणवश पिछली रात सोने में यदि देरी हो जाए और नींद पूरी ना होने के कारण सवेरे उठने में केवल 15 मिनट की देरी हो जाए तो आप उस व्यक्ति को इस बचे हुए 45 मिनिट में टॉयलेट करना, चाय पीना, दाढ़ी बनाना, नहाना, नाश्ता करना व बैग समेटकर ऑफिस, स्कूल, कॉलेज के लिए दौड़ना है | रोजाना 1 घंटे में यह संभव हो जाता है पर आज देरी से उठने के कारण 15 मिनट कम है इस समय की कमी के कारण वह टॉयलेट में जाकर प्रयत्न तो भरपूर करता है पर फिर भी मल बाहर निकलता नहीं, चिढ़ के मारे वह दाढ़ी बनाना इत्यादि काम बहुत ही कम समय में निपटाकर स्ट्रेस व टेंशन में जल्दी-जल्दी नहा लेता है | याद रखिए जो भी व्यक्ति स्नान, भोजन व वैवाहिक जीवन का सुख जल्दबाजी में करता है वह व्यक्ति कभी भी निरोगी नहीं हो सकता | ऐसा करने से शरीर को सामान्य होने में 24 घंटे से भी ज्यादा समय लग जाता है जिसके अंतर्गत आरोग्य की काफी हानि हो चुकी है | अब इस व्यक्ति ने तो  स्नान व नाश्ता जल्दबाजी में ही निपटाया है, यदि यही गलती महीने में कई बार करता है तो वह आरोग्य से काफी दूर होता जाएगा वह दीर्घकालीन असाध्य रोगों का शिकार हो जाएगा |

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