गोमुत्र नेत्रौषधि

घटक पदार्थ और उनकी मात्रा

  1. शरद पूर्णिमा की रात्रि में लिया हुआ गोमुत्र 100 मिलीलीटर
    (शरद पूर्णिमा की रात में गौमूत्र लेकर, उस पात्र को सफेद कपड़े से ढक दें, जिससे उसमें कूडा आदी न पड़े । अब इस गोमूत्र को शरद पूर्णिमा की चांदनी में पूरी रात रख दें । दूसरे दिन यह गोमुत्र चीनीमिट्टी की स्वच्छ बरनी में बंद कर रख दें । इस गोमुत्र पर चंद्र और चांदनी का संस्कार होने से यह आंखों के लिए बहुत हितकारी है । बरनी में रखा हुआ यह गोमुत्र कभी दूषित नहीं होता । अतः नेत्रौषधी बनाने के लिए इसका उपयोग कभी भी किया जा सकता है ।
  2. उत्तम गुलाब जल 35 मिलीलीटर
  3. छोटी मधुमक्खियों की शुद्ध मधु 3.5 मिलीलीटर
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बनाने की विधि

  1. शरद पूर्णिमा की रात में शुद्ध तांबे के पतीले में आधा पतीला खाली रख गोमुत्र लेकर, उसे लोहे की जाली वाले ढक्कन से ढककर मन्द आंच पर उबालें ।
  2. गोमूत्र तपने पर तांबे के सहयोग से बहुत झाग उठने लगता है ।
  3. गोमुत्र सुखकर जब 70% शेष रह जाए तब आंच बंद कर दें ।
  4. गोमुत्र थोडा समय उसी प्रकार रहने दें । इससे झाग समाप्त हो जाएगा ।
  5. इसके पश्चात स्वच्छ सूती कपड़े की चार परतें बनाकर उससे यह गोमुत्र छान लें और बरनी में रख दें ।
  6. अब इस गोमुत्र में इसका आधा, अर्थार्थ 50% गुलाबजल और 5% अर्थात 3.5 मिलीलीटर छोटी मधुमक्खियों की मधु छोडें और ठीक से मिलाकर एक जीव करें ।
  7. यह मिश्रण ड्रापर वाली शीशियों में भरकर रख दें ।

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