गोमय साबुन (त्वचाविकार)

घटक पदार्थ और उनकी मात्रा

  1. मुल्तानी मिट्टी 1 किलोग्राम
  2. नीम तेल 1 लिटर
  3. नारियल तेल 100 मिलीलीटर
  4. भीमसेनी कपूर 100 ग्राम
  5. गोमुत्र क्षार 1 लीटर
  6. गोमय रस 200 मिलीलीटर
  7. कास्टिक सोडा 20 ग्राम
  8. गोमूत्र 100 मिलीलीटर
  9. सोडियम सिलिकेट 500 मिलीलीटर
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बनाने की विधि

  1. साबुन को छांव में सुखाना पड़ता है इसलिए इसका उत्पादन ग्रीष्मकाल में करें ।
  2. साबुन बनाने से एक रात पहले एक बर्तन में कास्टिक सोडा गोमूत्र में भिगोकर रखें ।
  3. दूसरे दिन प्रातः कास्टिक सोडा और गौमूत्र के घोल को लकड़ी से हिला कर भली-भांति मिला दें । यह घोल शरीर को ना लगे, ऐसी सावधानी बरतें ।
  4. भीमसेनी कपूर का चूर्ण बनाकर उसे नारियल तेल में मिला दें ।
  5. एक बर्तन में गोमूत्र क्षार और गोमय रस का मिश्रण बनाकर रखें ।
  6. इसके पश्चात, एक लोहे की कड़ाही में नीम का तेल तपाएं ।
  7. इसके आगे का कार्य करने के लिए दो लोग लगते हैं ।
  8. साबुन बनाते समय उत्पन्न होने वाला धुआं नाक मुंह में न जाए, इसके लिए नाक मुंह उचित आकार के कपड़े से इस प्रकार बांधे की सांस लेने में अवरोध न हो ।
  9. इसके पश्चात, एक व्यक्ति एक हाथ में गोमूत्र क्षार और गोमय रस के मिश्रण का बरतन और दूसरे हाथ में गोमूत्र एवं कास्टिक सोडे का मिश्रण का बर्तन लें ।
  10. अब दोनों हाथ के बर्तनों से मिश्रण की समान धार कडाही में छोडे ।
  11. मिश्रण गिराते समय दूसरा व्यक्ति गरम तेल को करछुल से निरंतर चलाता रहे ।
  12. उपर्युक्त मिश्रण गिराना पूर्ण होने तक नीम का तेल और पानी आपस में ठीक से मिल जाते हैं ।
  13. इसमें थोड़ी-थोड़ी मुल्तानी मिट्टी मिलाते हुए मिश्रण को अच्छे से मिलाएं ।
  14. इसके पश्चात कडाही को चूल्हे से उतार कर उसमें सोडियम सिलिकेट डालकर मिश्रण को मिला लें । सोडियम सिलिकेट ऐसा खनिज द्रव है, जिसे मिलाने से गीला साबुन टूटता नहीं ।
  15. पूरा मिश्रण गुनगुना होने पर उसमें नारियल तेल और भीमसेनी कपूर का घोल छोड़कर उसे भली-भांति मिला दें ।
  16. यह मिश्रण ठंडा होने पर सांचे में डालकर साबुन की टिकिया बना लें ।
  17. सांचे से साबुन शीघ्र निकल सके, इसके लिए प्रत्येक बार उसे पानी में डुबाकर प्रयोग में लाएं ।
  18. मिश्रण सांचे में डालने पर साबुन का पृष्ठ भाग खुरदरा होने लगे, तो थोड़ा पानी लगा कर उसे चिकना कर लें ।
  19. साबुन की टिकिया धूप में सुखाने पर उनसे तेल निकलता है । इसलिए, उन्हें छांया में सुखाएं ।
  20. सुखी टिकिया थैली में अथवा गत्ते की पेटी में भरकर रखें ।

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